बाबा नगरी दूर है जाना जरूर है वाकई बड़कागाँव के कांवरिया भक्तों ने इसे साबित किया है। झारखंड के हजारीबाग जिला बड़कागाँव नापो खुर्द से भोले के भक्तों का सैलाब जथ्था 800 किलोमीटर की दूरी पैदल यात्रा कर खुश करेंगे बाबा को

बड़कागाँव मुरली पहाड़ नापो खुर्द से कृष्णा कुमार, बबलू कुमार सहित दर्जनों युवाओं का जत्था पैदल सुलतानगंज, देवघर, बासुकीनाथ कांवर यात्रा का संकल्प लेकर निकल चुके हैं।

जहाँ एक तरफ आज की युवा पीढ़ी धर्म और आस्था से दूर होती नजर आ रही है, वहीं इन युवाओं ने इन सभी ने वर्तमान के युवा पीढ़ी के लिए एक मिशाल कायम किया। और संदेश दिया है कि चाहे आप कितने भी धनी और गुणवान हो जाये धर्म और आस्था से जुड़े रहना ही सनातन संस्कृति को बचा सकती है।

आइए आपको बताते हैं कितना कठिन हैं कावड़ यात्रा के नियम, थोड़ी सी चूक से पूरी मेहनत हो सकती है निष्फल, सावन में ऐसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न

देवघर के बैद्यनाथधाम के तीर्थपुरोहित ने जानकारी देते हुए कहा कि सावन माह में कावड़ यात्रा की जाती है और कावड़ यात्रा में कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है अन्यथा आपकी यात्रा निष्फल हो सकती है.

सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से होने वाली है. सावन भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना माना जाता है, इसलिए सभी शिवालयों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ती है. सावन के महीने में देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में कावड़ यात्रा की परंपरा है. यानी की बिहार के भागलपुर जिले के अजबेगीनाथधाम से भक्त संकल्प लेकर जल भरते हैं और 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुंचते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है अन्यथा आपकी कावड़ यात्रा निष्फल मानी जाती है. कांवड़ यात्रा के दौरान क्या कुछ नियम का पालन करना जरूरी है इस बारे में बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित जी से जानते हैं.

क्या कहते हैं बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित

देवघर बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित बताते हैं कि सबसे पहले यात्रा के दौरान भौतिक वस्तुओं का त्याग किया जाता है. इस यात्रा के दौरान आंतरिक रूप से पवित्र और संयम रहना पड़ता है. कांवड़ यात्रा शिव भक्ति की एक कठिन परीक्षा है जिसे समर्पण और प्रेम भक्ति से पूर्ण किया जा सकता है. कांवड़ यात्रा के दौरान जो भी भक्त अनुशासन के साथ यात्रा करता है भगवान भोलेनाथ उनकी मनोकामनाएं जल्द पूरी करते हैं. घर में सुख समृद्धि की वृद्धि होती है. तो चलिए आपको बताते हैं कांवड़ यात्रा के दौरान किन नियमों का पालन करें.

मन को शुद्ध और सात्विक करें
तीर्थपुरोहित बताते हैं की अगर श्रावनी माह में आप भी कावर यात्रा करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने आप को शुद्ध और सात्विक कर लें. क्योंकि कावड़ यात्रा के दौरान दाढ़ी,बाल,नाखून कटवाना मनाही होता है।

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