आम्रपाली कोल परियोजना में नई आउटसोर्सिंग कम्पनी के आने से विस्थापित गांव में लगातार ग्रामीण बैठकों का दौर जारी है। विस्थापित गाँव कुमरांग कला में भी ग्रामीणों का महाबैठक का आयोजन।

आम्रपाली कोल परियोजना में नई आउटसोर्सिंग कम्पनी के आने से विस्थापित गांव में लगातार ग्रामीण बैठकों का दौर जारी है। विस्थापित गाँव कुमरांग कला में भी ग्रामीणों का महाबैठक का आयोजन।

विभिन्न पार्टीयो से जुड़े नेता प्रतिनिधि का भी सोशल मीडिया पर बयानबाजी तेजी से जारी है। सभी नई कम्पनी को अपनी शक्ति काबिलियत और उपस्थिति दिखाने में जुटे नजर आ रहे हैं।

आपको बताते चले कि झारखंड में संचालित तमाम कोल परियोजनाओं में आम्रपाली कोल परियोजना ही ऐसी परियोजना है जहाँ एक दशक के अंतराल में कोई भी बाहरी नेता मंत्री अपना सिक्का या धौंस वहाँ नही जमा पाए। बल्कि वहाँ के विस्थापित ग्रामीण भू रैयत ही एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते देखे गए और बाहरी आंदोलन जीवी नेताओं का लगातार विरोध करते भी रहे। जिसके फलस्वरूप आम्रपाली कोल परियोजना में माइन्स विस्तार हो या नए टेंडर के बाद नई कंपनी का आगमन होने पर भी सीसीएल प्रबंधन को शुरुआती दौर में विस्थापित ग्रामीणों का विरोध जरूर झेलना पड़ा लेकिन जैसे ही भू रैयतों के साथ कंपनी प्रबंधन ने संतोषजनक वार्ता किया और सभी विस्थापित भू रैयतों के विचारों का सम्मान किया उसके बाद परियोजना का कार्य कभी बंद नही हुआ।

जिसका सटीक उदाहरण वर्तमान जीएम अमरेश कुमार जी का कार्यकाल भी है जब सीसीएल प्रबंधन के पास माइन्स विस्तार के लिए कहीं जमीन नही बचा था, तब विस्थापित परिवार ने सीसीएल प्रबंधन के साथ आपसी समन्वय बनाकर बिना नॉकरी मुवाबजा लिए अपने जमीन को कटवा दिया जिससे परियोजना विस्तार में दिक्कत न हो। हालांकि जीएम अमरेश कुमार के कार्यकाल में त्वरित कार्य करते हुए रैयतों के नॉकरी मुवाबजा के फाइल को प्रोसेस करवाकर सैकड़ो ग्रामीण युवा युतियों को सीसीएल में नॉकरी भी दिया गया।

लेकिन फिर एक बार आम्रपाली कोल परियोजना में नई कम्पनी के आगमन से परियोजना से विस्थापित सभी गाँव मे ग्रामीण भू रैयतों का बैठक का दौर जारी है। उसी बीच आम्रपाली कोल परियोजना से विस्थापित गांव कुमरांग कला में दिन रविवार को बालाटॉड मैदान में ग्रामीणों की महाबैठक आयोजित हुई। सभा की अध्यक्षता रंजन कुमार शर्मा ने किया। बैठक मैं कुमरांग कला गांव के सभी टोला, बस्ती से सैकड़ो ग्रामीण, महिला एकत्रित हुए, सभी ग्रामीणों ने बारी -बारी से निजी और सार्वजनिक समस्याओं से सभा को अवगत कराया। जिनमे मुख्य रूप से सीसीएल द्वारा सम्पूर्ण अधिग्रहित रैयती, जीएम जेजे जमीन का एकसाथ सत्यापन, परियोजना क्षेत्र में सम्पूर्ण फारेस्ट डायवर्जन करवाकर संबंधित भू रैयत को नॉकरी मुवाबजा देना, कुमरांग कला- कुमरांग खुर्द और उरसु गांव की सहमति से 2 कांटा घर स्थापित कराना, वहीं उपस्थित महिलाओं ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि अब खेती किसानी, जंगल सब उजड़ गया है जिसके कारण न ही पशुपालन कर सकते है न ही किसानी ऐसे में उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति आउटसोर्सिंग कंपनी में भी रोजगार से जुड़ा हुआ नही है, जीवन यापन करने में बहुत कठिनाई हो रही है, इसलिए उनके परिवार के सदस्यों को भी रोजगार मुहैया कराया जाए। वहीं सभा में उपस्थित प्रेम विकास उर्फ मंटू सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व में अज्ञानता वश जो भी गलतियां हुई है उसे दोहराया नही जाएगा, कोई भी गैर संबैधानिक कार्य हम भू रैयत नही करेंगे। कानून व्यवस्था के साथ जुड़कर प्रशासन के साथ सहयोग से अपने हक़ अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे, विस्थापित गांव का प्रतिनिधित्व करने से भी प्रेम विकास ने एक सिरे से सभा के बीच मे इंकार कर दिया, और कहा कि कुमरांग कला के विस्थापित ग्रामीण जिनको भी अपना प्रतिनिधि नेता चुनेंगे हम भी एक आम ग्रामीण बनकर सभी के विचारों के साथ चलेंगे। अजय नारायण देव ने कम्पनी और प्रबंधन की दलाली करने वाले ग्रामीणों को भी दो टूक में कहा कि ऐसे लोग सचेत हो जाये जो खुद के निजी स्वार्थ के लिए दलाली करके गांव ग्रामीण को उनके हक अधिकार से बंचित रखना चाहते हैं। वहीं बैठक में उपस्थित सेकड़ो ग्रामीणों ने मिलकर निम्नलिखित प्रस्ताव लिया, जिनमे सर्वसहमति से निर्णय लिया गया कि सभी विस्थापित ग्रामीण एकजुट होकर सुख – दुख में साथ रहेंगे। आम्रपाली कोल परियोजना में तीसरे चरण में खनन कार्य करने आये केलिवर माइनिंग जॉइंट वेंचर कंपनी के द्वारा बिना भू रैयतों को सूचना दिए बगैर भूमि पूजन का कार्य करना बेहद निंदनीय है। सर्वसहमति से निर्णय लिया गया की सीसीएल प्रबंधन, प्रशासन, विस्थापित ग्रामीण एवं जिला प्रशासन की उपस्थिति में वार्ता सफल होने पर ही नई कंपनी केलिवर माइनिंग जॉइंट वेंचर द्वारा खनन कार्य या ट्रांसपोटिंग किया जाए। सर्वसहमति से निर्णय लिया गया कि विस्थापित गांव की जनसंख्या को मानक मानते हुए ही रोजगार और सभी प्रकार की सुविधा मुहैया कराया जाए। वहीं समस्त कुमरांग कला के ग्रामीणों के द्वारा ग्राम बैठक में लिए गए निर्णय की कॉपी सीसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया जाएगा। वही बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने बताया कि विस्थापित ग्रामीण कोई भी निर्णय या विरोध, सीसीएल प्रबंधन, प्रशासन एवं जिला प्रशासन को बिना अवगत कराएं नही करेंगे। ग्रामीणों को जिला प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन पर पूरा विस्वास है कि विस्थापित भू रैयतों को उनका हक अधिकार से बंचित नही रखा जाएगा। बैठक में उपस्थित, मोहन राणा, भरत राणा, सुखलाल भुइयां, मिठ्ठू राम, मनोज नारायण दास, प्रेम विकास, नवीन कुमार, शंभु कुमार, आंनद कुमार, सुरेश साव, चुनु सिंह, अजय नारायण देव सहित सैकड़ों महिला पुरुष उपस्थित थे।

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झारखंड में संचालित कोल परियोजनाओं में बड़का साहब कि कमीशनखोरी, अनगिनत टेबुल खर्च, फिक्स महीना वसूली, और अब कोयला ट्रांसपोर्टिंग में प्रति टन टना टन वसूली का फरमान से त्राहिमाम कर रहे हैं कोयला ट्रांसपोर्टर व्यवसायिक वर्ग

आम्रपाली – चन्द्रगुप्त क्षेत्र के नये महाप्रबंधक संजीव कुमार ने लिया पदभार बोले परियोजना विस्तार के लिए जमीनों की पड़ती हैं आवश्यकता रैयत बिना किसी झिझक के परियोजना विस्तार के लिए प्रबंधन के साथ रहें खड़ा रैयतो के समस्यायों के समाधान के लिए रहूँगा सदैव तत्पर

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