टेंडर प्रक्रिया के ओलझोल में फंसे सीसीएल की कामधेनु परियोजना आम्रपाली में बिगत 20 दिनों से पसरा हुआ है सन्नाटा। बीएलए कंपनी को 13 मिलियन टन कोयलां उत्खनन कार्य शुरू करने से पहले एएमपीएल कंपनी द्वारा बैठाए गए,650 वर्करों को रोजगार से जोड़ने की चुनोती।

टेंडर प्रक्रिया के ओलझोल में फंसे सीसीएल की कामधेनु परियोजना आम्रपाली में बिगत 20 दिनों से पसरा हुआ है सन्नाटा।

आम्रपाली में 8200 करोड़ का टेंडर कलिंगा कम्पनी को मिलने के बाद भी नही सुलझ रही माइन्स शुरू होने की गुत्थी।

टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने में कलिंगा कंपनी नही दिखा रहा कोई दिलचस्पी👉सूत्र

13 मिलियन टन कोयलां उत्खनन का केस न्यायालय द्वारा सीसीएल के फेवर में आने के बाद बीएलए कंपनी को करना होगा कोयलां उत्खनन कार्य,

बीएलए कंपनी को कार्य शुरू करने से पहले एएमपीएल कंपनी द्वारा बैठाए गए,650 वर्करों को रोजगार से जोड़ने की चुनोती।

कंपनी प्रबंधन पहले विस्थापित ग्रामीण भू रैयतों से वार्ता करके विस्थापन, पुर्नवास, रोजी रोटी, जीएम जेजे जमीन सत्यापन, फारेस्ट डायवर्जन जैसे समस्याओं का निवारण करने के उपरांत ही कोई भी कार्य प्रारंभ करें👉प्रेम विकास( सीसीएल सांसद प्रतिनिधि चतरा लोकसभा)

कोयलां खनन करने के लिए विस्थापित रैयत सीसीएल प्रबंधन को जमीन देते हैं आये हैं। लेकिन खनन कार्य शुरू होने के बाद प्रबंधन स्थानीय लोगो के ट्रक, हाइवा पे लोडर को खड़ा करवाकर बाहरी वाहन, बाहरी लिफ्टर ट्रांसपोर्टर से करवाता है कोयलां का सम्प्रेषण कार्य। प्रबंधन विस्थापित भू रैयतों के ट्रक हाइवा को प्राथमिकता देकर कोयलां का सम्प्रेषण कार्य करे तभी विस्थापित भू रैयत करेंगे सहयोग👉 इंदर साव(ग्रामीण ट्रक ऑनर)

ये वक्त है शांति और सहयोग के भाव से आगे बढ़ने का, आम्रपाली कोल परियोजना विस्थापित ग्रामीण भू रैयतों के सहयोग और स्नेह से ही चल रहा है। प्रबंधन विस्थापित भू रैयतों के रोजी- रोजगार से जुड़े सभी समस्याओं को मिल बैठकर सुलझाएगी।👉प्रबंधन

सीसीएल की कामधेनु परियोजना आम्रपाली में बिगत 20 दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है। जहां इस वर्ष सीसीएल को मार्च महीने तक 24 मिलियन टन कोयलां का उत्पादन करके अपना लक्ष्य पूरा करना है। जिसमे अभी तक मात्र 6 मिलियन टन ही कोयलां का उत्पादन हो पाया है। वहीं लगातार 20 दिनों से माइन्स बंद रहने से सीसीएल प्रबंधन को अब तक सौ करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान हुआ है। पिछले वर्ष 2200 करोड़ का मुनाफा देने वाली सीसीएल की कामधेनु आम्रपाली कोल परियोजना में कोयलां उत्पादन और सम्प्रेषण पूरी तरह बंद है। हालांकि 8200 करोड़ का नया टेंडर कलिंगा नामक कंपनी ने लिया है। लेकिन कहते हैं न जब राहु केतु घेर ले तो बना हुआ कार्य भी बिगड़ जाता है। आम्रपाली परियोजना में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। जनवरी 2025 में सीसीएल प्रबंधन ने माइन्स विस्तार के लिए नया टेंडर निकाला, जिसमें केलिवर जॉइंट वेंचर कम्पनी को टेंडर मिला। केलिवर कंपनी आम्रपाली में कार्य करने की तैयारी में लगा ही था कि तभी खबर आया कि टेंडर का मामला कोर्ट में चला गया। इसी क्रम में सीसीएल प्रबंधन ने त्वरित माइन्स को चालू रखने के लिए 13 मिलियन टन कोयलां उत्खनन का टेंडर निकाला, लेकिन ऐन केन प्रकार से यह टेंडर भी कोर्ट केस में फस गया और फैसला न्यायालय के पास विचाराधीन रहा। केलिवर माइनिंग जॉन्ट वेंचर को मिले टेंडर का फैसला 5 महीन कोर्ट में चलने के बाद न्यायालय ने इस टेंडर को केंसिल कर दिया और सीसीएल प्रबंधन को नया टेंडर करने का आदेश दिया। इस बीच सीसीएल प्रबंधन के पास आम्रपाली में कोयलां के नाम पर कोयलां स्टॉक में कोयले का धूल भी नही बचा। सीसीएल प्रबंधन ने आनन फानन में न्यायालय के आदेश के बाद नया टेंडर भी निकला जिसमे कलिंगा नामक कंपनी ने 24.39 परसेंट लो रेट डालकर टेंडर अपने नाम कर तो लिया लेकिन सूत्रों की माने तो कलिंगा कंपनी भी टेंडर मिलने के बाद टेंडर प्रकिया को पूरा करने में असमर्थता जता रही हैं। जिससे सीसीएल प्रबंधन के पास अब माइन्स तुरंत चलाने का कोई विकल्प नही बचा। इसी बीच पंद्रह सितंबर सोमवार को न्यायालय ने 13 मिलियन टन कोयलां उत्पादन का केश सीसीएल के फेवर में सुनाया और 13 मिलियन कोयलां निकालने का कार्य बीएलए नामक कम्पनी को मिल गया। जिसके बाद सीसीएल प्रबंधन ने थोड़ा चैन का साँस तो लिया लेकिन वहीं वर्तमान में कोयलां ओबी उत्खनन का कार्य कर रही अम्बे- महालक्ष्मी जॉइंट वेंचर कंपनी ने भी कार्य बंद होने के कारण नो वर्क नो पे का नॉटिस निकालकर 650 वर्करों को बैठा दिया है। लेकिन जैसे ही वर्कर यूनियन और विस्थापित भू रैयतों को पता चला कि अब बीएलए कम्पनी कोयलां उत्खनन का कार्य करेगी वर्करों में चर्चा का बाजार गरम हो गया है। आउटसोर्सिंग कंपनी के लेबर यूनियन लीडर रमेश वर्मा, गुरुदयाल साव और वर्करों ने बताया की आम्रपाली में कोई भी कंपनी कार्य करने आये उसे 650 वर्करों को सबसे पहले रोजगार से जोड़ना होगा। और विस्थापित गांव में अभी भी 200 से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं उन्हें भी रोजगार देना होगा तभी कंपनी को कार्य करने में सहयोग किया जा सकता हैं। वहीं विस्थापित गाँव मे लगातार चल रहे ग्राम सभाओं में भी ग्रामीण भू रैयत विस्थापन, पुर्नवास, मुवाबजा दर, रोजीरोटी, मूलभूत सुविधा,जीएम जेजे सत्यापन, फारेस्ट डायवर्सन जैसे मुद्दों पर गोलबंद होकर स्पष्ट बोल रहे हैं कि जब तक कम्पनी और सीसीएल प्रबंधन ग्रामीणों के सभा मे आकर वार्ता नही करती है तब कंपनी प्रबंधन अपना कार्य नही करे। जानकार यह भी बताते हैं कि जहां एक तरफ माइन्स बंद रहने से सीसीएल प्रबंधन को नुकसान हो रहा है वहीं, आम्रपाली कोल परियोजना में विस्थापित -प्रभावित गांव के लगभग 1000 ट्रक, हाइवा, पे लोडर हैं जो बिगत एक महीने से कोयलां उत्खनन, सम्प्रेषण नही होने के अभाव में खड़ा है। जिससे क्षेत्र में बृहद आर्थिक तंगी से लोग गुजर रहे हैं। बैंक फाइनेंस कंपनी क़िस्त नही मिलने के कारण गाड़ियों को सीज करने के लिए गिध्द के तरह नजर लगाए बैठे हैं। इसी क्रम में ट्रक एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष प्रह्लाद सिंह और स्थानीय ग्रामीण नेता इंदर साव से बातचीत किया तो उन्होंने बताया कि आम्रपाली कोल परियोजना खुलने के बाद से अभी तक कोयलां के अभाव में ट्रक, हाइवा कभी खड़ा नही रहा है। इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जो वाकई घोर चिंता का विषय है। बहरहाल आगे क्या होता है? कैसे सीसीएल प्रबंधन इस गुथ्थी को सुलझाने में सफल हो पाता है? कौन एएमपीएल कम्पनी द्वारा बैठाए गए 650+200 वर्करों को रोजगार से जोड़ता है? कैसे प्रबंधन ग्रामीण भू रैयतों के रोजी रोटी, विस्थापन, पुनर्वास, जीएम जेजे जमीन सत्यापन,फारेस्ट डायवर्जन जैसे जटिल समस्याओं से रूबरू होता है? कैसे महीने भर से खड़े 1000 ट्रक,हाइवा, पे लोडर का पहिया घूमता है? इन सभी सवालों के जबाब पर टिका है आम्रपाली कोल परियोजना को पुनः शुरू होना।

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झारखंड में संचालित कोल परियोजनाओं में बड़का साहब कि कमीशनखोरी, अनगिनत टेबुल खर्च, फिक्स महीना वसूली, और अब कोयला ट्रांसपोर्टिंग में प्रति टन टना टन वसूली का फरमान से त्राहिमाम कर रहे हैं कोयला ट्रांसपोर्टर व्यवसायिक वर्ग

आम्रपाली – चन्द्रगुप्त क्षेत्र के नये महाप्रबंधक संजीव कुमार ने लिया पदभार बोले परियोजना विस्तार के लिए जमीनों की पड़ती हैं आवश्यकता रैयत बिना किसी झिझक के परियोजना विस्तार के लिए प्रबंधन के साथ रहें खड़ा रैयतो के समस्यायों के समाधान के लिए रहूँगा सदैव तत्पर

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