

चतरा, टंडवा में संचालित आम्रपाली कोल परियोजना में आउटसोर्सिंग कम्पनी कैलिबर माइनिंग जॉइंट वेंचर कम्पनी ने 139 मिलियन टन कोल उत्खनन के लिए नारियल फोड़कर विधिवत पूजा किया। वहीं आम्रपाली कोल परियोजना से विस्थापित भू रैयतों ने केलिवर माइनिंग कम्पनी प्रबंधन को इसके लिए बधाई देते हुए कहा है कि कम्पनी ने आम्रपाली में कार्य करने का ठेका लिया है, वह कार्य जरूर करेगी, क्योकि कोयला देश की जरूरत है, जिसका उत्खनन होने या करने से ग्रामीण नही रोकेंगे। लेकिन किसी भी कंपनी का प्रोटोकॉल यही कहता है कि बिना विस्थापित भू रैयत ग्रामीणों से वार्ता किये कम्पनी प्रबंधन कार्य नहीं कर सकती है। भू रैयतों का कहना है कि आम्रपाली कोल परियोजना 2013 में जब खुला, तब बीजीआर माइनिंग कम्पनी ने कार्य शुरू करने से पहले विस्थापित भू रैयतों के साथ वार्ता करके उनको 100% रोजगार से जोड़ने का भरोसा देकर, सभी पहलुओं पर चर्चा करके ही कार्य प्रारंभ किया। वहीं 2016-17 में जब महालक्ष्मी अम्बे माइनिंग जॉइंट वेंचर कंपनी को आम्रपाली में बीजीआर के बाद टेंडर मिला, तो उपरोक्त कम्पनी प्रबंधन ने भी कार्य प्रारंभ करने से पहले प्रत्येक विस्थापित गाँव मे जाकर भू रैयतों के साथ वार्ता किया, सभी बेरोजगार विस्थापित ग्रामीणों की सूची लेकर 100% ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने का कार्य किया, साथ ही साथ कम्पनी ने प्रत्येक ग्रामीण भू रैयतों के रैयती ,गरमजूरवा, जेजे जमीन का सत्यापन भी महालक्ष्मी- अम्बे माइनिंग कम्पनी प्रबंधन ने अपने खर्च पर करवाकर, भू रैयतों को सीसीएल में नॉकरी जॉइन करने में सहयोग किया। जैसा कि विस्थापित भू रैयतों ने बताया कि अम्बे – महालक्ष्मी कम्पनी सैकड़ो बृद्ध महिला पुरूष को भी घर बैठे बेरोजगारी भत्ता प्रतिमाह देने का कार्य कर रही है। ऐसे में नई कम्पनी केलिवर माइनिंग जॉन्ट वेंचर के द्वारा बिना ग्रामीणों से वार्ता किये नारियल फोड़ने से भू रैयतों में आक्रोश पनप रहा है। आम्रपाली परियोजना से विस्थापित सभी गाँव मे भू रैयत एकजुट होकर लगातार बैठक कर रहे हैं। जिससे एक बार फिर से आम्रपाली कोल परियोजना में लंबे समय तक बंदी होने की बू आ रही है। विस्थापित भू रैयत एक बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं। लिहाजा परियोजना से विस्थापित भू रैयत केलिवर माइनिंग कम्पनी से वार्ता क्यों चाहते हैं इसे भी समझना जरूरी है । विस्थापित भू रैयत आम्रपाली परियोजना में एक साथ सम्पूर्ण अधिग्रहित क्षेत्र के जमीन का फारेस्ट डायवर्जन करवाने की मांग कर रहे हैं तभी ग्रामीण बचे हुए फारेस्ट जमीन में कार्य कंपनी को करने देंगे, सम्पूर्ण जीएम- जेजे रैयती जमीन का सत्यापन केलिवर माइनिंग कंपनी अपने खर्च पर करवाकर रैयतों को सहयोग करे। वर्तमान में कार्यरत अम्बे- महालक्ष्मी कम्पनी में जितने भी एचपीसी- जनरल वर्कर हैं उन सभी वर्करों की सूची लेकर केलिवर माइनिंग कम्पनी में सभी विस्थापित वर्करों का समावेश हो, वहीं बचे हुए विस्थापित बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार से जोड़ने की मांग ग्रामीण अपने बैठकों में कर रहे हैं। बहरहाल सीसीएल प्रबंधन परियोजना से विस्थापित होने वाले परिवारो को अपना बृहद परिवार समझती मानती है। वैसे में केलिवर माइनिंग जॉइन्ट वैंचर कम्पनी विस्थापित भू रैयतों से वार्ता करके और सभी भू रैयतों के आपसी मेल मिलाप सहयोग से कार्य करती है,या फिर अपनी ऊंची पहुँच- पैरवी, दबंगई से कार्य करती है ये कंपनी प्रबंधन के कार्यशैली पर निर्भर करता है।
