दैनिक अखबार के रांची एडीशन में छपी खबर का आम्रपाली से चलने वाले हजारों ट्रक मालिक ने विरोध किया है।

*एक दैनिक अखबार में छपी खबर भ्रामक, सत्य से परे और पड़ताल के बगैर छपी है खबर*

*वर्ष 2018 से 2022 तक विभिन्न ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने इस क्षेत्र के वाहन मालिकों का करोड़ों रुपए गए डकार*

*एक भी वाहन मालिक द्वारा स्थानीय थाना में कोई भी मामला दर्ज नहीं*

रांची: दैनिक अखबार के रांची एडीशन में छपी खबर का आम्रपाली से चलने वाले हजारों ट्रक मालिक ने विरोध किया है। साथ ही सभी वाहन मालिकों ने इसे बिल्कुल भ्रामक खबर बताया है। आम्रपाली विस्थापित- प्रभावित वाहन मालिकों ने कहा है कि बिना किसी सच्चाई और खोजबीन के अखबार मे मनगढ़ंत कहानी छपी है। दैनिक अखबार के पत्रकार द्वारा अपने ही संकलन में लिखा गया है कि स्थानीय थाना में इस तरह के किसी भी शिकायत को एक भी वाहन मालिक द्वारा आजतक नही किया गया। फिर भी दैनिक अखबार के पत्रकार द्वारा आम्रपाली कोल परियोजना और इससे विस्थापित- प्रभावित परिवार को बदनाम करने की साजिश किसके इशारे पर किया जा रहा है। इसकी खोजबीन और शिकायत भी वाहन मालिक का एक टीम राँची दैनिक अखबार के कार्यालय में जाकर करेंगे। जहाँ दैनिक अखबार जैसे प्रतिष्ठित अख़बार के एक राँची के रिपोर्टर द्वारा अपने निजी लाभ लेने के मकसद से विस्थापित- प्रभावित गाँव का नाम लिखकर विस्थापित- प्रभावित ग्रामीणों एवं वाहन मालिकों को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। वाहन मालिकों ने स्पष्ट कहा है कि आम्रपाली में कोई अवैध वसूली नहीं किया जाता है। वाहन मालिक अपना सुविधा अनुसार बेरोजगार मजदूरों को ट्रक लायनिंग में लगाने, जाम नही लगने देने और अधिक से अधिक ट्रक अपना अपना ट्रिप करे, लोडिंग फोर्मेट जल्द मिले, वाहन मालिकों को भाड़ा जल्द मिले, उनका भाड़ा डुबे नहीं, इसको लेकर स्वेच्छा से बेरोजगार युवकों को सुविधा शुल्क देते हैं, जिसका वाहन मालिकों ने आगे कहा कि क्या अपना ट्रक का देखभाल करने के लिए मजदूर रखना गुनाह है, अपना ट्रक सुरक्षित रखना गुनाह है। वाहन मालिक संघ का कहना है कि कोयला ट्रांसपोर्टिग करने वाली विभिन्न कंपनियां वर्ष 2018 से लेकर 2022 तक अरबों रुपए डकार लिया गया।इस मामले पर संबंधित अखबार दैनिक अखबार ने कभी भी वाहन मालिकों के दर्द को संबंधित दैनिक अखबार में प्रकाशित नही किया। और तो और जिस कारण सैंकड़ो विस्थापित प्रभावित ट्रक मालिकों का ट्रक फाइनेंसर सीज कर लिया, कई लोगों ने कर्ज के बोझ तले अपने आप को फांसी लगा लिया ।कितने ट्रक मालिकों को और कर्ज लेना पड़ा, तब जाकर वाहन मालिकों ने स्वतः निर्णय लेकर मजदूरों को बहाली की, क्या दैनिक अखबार इन सबका भरपाई कर पाएगी, क्या हमलोग का ट्रक चलवा देगी। जिस जल- जंगल- जमीन को न्योछावर करके आज विस्थापित- प्रभावित अपने अधिकारों- रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है। काश संबंधित अखबार में राँची के पत्रकार द्वारा इनके आपबीती का प्रकाशन करवाता। लेकिन झुठी खबर के आड मे आखिर अखबार से संबंधित तथाकथित व्यक्ति का क्या टार्गेट है। क्या दैनिक अखबार के प्रबंधन खबर प्रकाशित करने से पहले खबर की सत्यता की जाँच नही करता है। क्या तथाकथित व्यक्ति को टार्गेट रांची संकलन से पूरा नहीं हो पा रहा है।क्या स्थानीय स्तर पर संबंधित अखबार के प्रतिनिधि नहीं हैं, अगर हैं तो क्या उनसे लोकल क्षेत्र का सच्चाई पुछा गया।यह खबर सिर्फ वाहन मालिकों को दवाब बनाकर मोटी रकम वसूलने के एक माध्यम है, वाहन मालिकों ने एक स्वर में कहा कि हम सभी वाहन मालिक इस तरह का खबर का विरोध करते हैं और अखबार के वरिष्ठ पत्रकारों से आग्रह करते हैं कि ऐसी भ्रामक खबर ना फैलाएं सच्चाई का पता अवश्य करें, आम्रपाली मे ना तो कोई उग्रवादी संगठन सक्रिय है और ना हीं कोई गैंग। सभी वाहन मालिक हैं, कोई कर्ज लेकर कोई घर का रखा पैसा, जेवर बेचकर ट्रक खरीदकर रोजगार चला रहें हैं ।अगर ट्रकें चलेंगी नहीं, हमलोगों का बाल बच्चा भूखा रहेगा, कैसे पढ़ाएंगे हम अपने बच्चों को। भ्रामक खबर छपने से सभी वाहन मालिक परेशान हैं।और अखबार प्रबंधन से आग्रह कर रहें है कि हमे भी जीने का अधिकार है, हमे भी रोजगार , व्यवसाय करने का अधिकार है, हमे भी अपने वाहनों की सुरक्षा हेतु मजदूर रखने का अधिकार है, हमे भी अपने परिवार के भरण पालन हेतु संघर्ष करने का अधिकार है। और उस दैनिक अखबार में छपे भ्रामक खबर का एक पाठक होने के नाते अखबार प्रबंधन से शिकायत करने का अधिकार है। जिस क्षेत्र में कोल परियोजना खुले 10 वर्ष हो गए हैं और स्थानीय परिवार अपना देश अपने राज्य के विकास के नाम अपना सर्वस्त्र लुटाकर बैंक का कर्जदार हो गया है। धूलकण से ग्रसित, घर मकान सब उजड़ गया है। गाँव समाज सब तीतर- बितर हो गया है क्या ऐसे में हम अपने रोजगार और ट्रक वाहन व्यवसाय को सुरक्षित रखने के लिए मजदूर रखकर उनसे अपना कार्य नही करवा सकते हैं।समस्त विस्थापित-प्रभावित वाहन मालिक परिवार की और से एक विनम्र अपील है।

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झारखंड में संचालित कोल परियोजनाओं में बड़का साहब कि कमीशनखोरी, अनगिनत टेबुल खर्च, फिक्स महीना वसूली, और अब कोयला ट्रांसपोर्टिंग में प्रति टन टना टन वसूली का फरमान से त्राहिमाम कर रहे हैं कोयला ट्रांसपोर्टर व्यवसायिक वर्ग

आम्रपाली – चन्द्रगुप्त क्षेत्र के नये महाप्रबंधक संजीव कुमार ने लिया पदभार बोले परियोजना विस्तार के लिए जमीनों की पड़ती हैं आवश्यकता रैयत बिना किसी झिझक के परियोजना विस्तार के लिए प्रबंधन के साथ रहें खड़ा रैयतो के समस्यायों के समाधान के लिए रहूँगा सदैव तत्पर

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